कमरा किराया और मैं
मैं एक कमरे में अकेले रहता हूं। इसका मतलब ये नहीं की कमरा मेरा है। कमरा, किराए का है। वो हर महीने आती है, बस एक बार।
मैं तो चाहता हूं की किराया कही न जाए, बस मेरे पास ही रहे, हमेशा।
किराया इक लड़की है, और उसे पटा पाना मेरे लिए मुश्किल। पटा भी लो तो अगले महीने फिर से पटाओ, मामला ज़रा आपसी है।
वो मेरा ध्यान भी रखती है। मेरे उठने से पहले टंकी में पानी भर देती है, नल या पंखा खराब हो तो तुरंत सुधार देती है। किराए की वजह से ही शायद मैं बेफिक्र होकर सो पता हूं। उसने कुछ नियम भी बनाए है मेरे लिए। जैसे की मैं हीटर या कूलर इस्तेमाल नहीं कर सकता, वो सोचती है की यह कर के मैं बिजली की तरफदारी कर रहा हूं। बात ज़रा हास्यास्पद है, पर बिजली को वो अपना सौतन मानती है।
एक दिन अचानक मैंने किराए को कमरे से बात करते देखा। बेशक किराया उससे मेरे बारे में ही पूछ रही थी, पर कमरा हर बार की तरह.... खामोश। मैं पीछे खड़े सब देख रहा था। किराये ने मुझे देख लिया, उसने मुझसे कुछ पूछना चाहा, पर मुंह फेर कर चली गई।
वो नाराज़ थी क्युकी इस महीने मैने उससे बात नही की। पर मुझे पता है वो अगले महीने फिर आयेगी, दो सवाल लेकर। एक इस महीने का, और एक पिछले महीने का।
"मैं भला क्या जवाब दूंगा?"
मैंने खामोश कमरे से पूछा।
कमरा भी बहुत अछा है। मेरे बारे में उसे सब पता है। इतने दिनों से हम साथ है, इसलिए मैं भी उसका हर कोना पहचानता हूं।
खैर, उसने मेरे सवाल का जवाब अभी तक दिया नही था।
और ना ही किराया का जवाब था मेरे पास है।
ऐसे ही कुछ दिन बीतते गए।
फिर.....
सवाल का जवाब न दे पाने की वजह से, किराया ने मुझे अपनी जिंदगी से चले जाने को कहा। उसने कहा कि अब उसकी जिंदगी में कोई और आने वाला है।
..........
मैंने कमरे से अपना सारा समान बाहर निकाल लिया। और जब मैं जाने वाला था.... मैंने कमरे की ओर पीछे मुड़ कर देखा।
कमरा अंधेरे में अकेले बैठा था।
उसकी खामोशी कुछ बया कर रही थी।
किराए के स्वार्थ ने, कमरे को अंधेरे में धकेल दिया था। पर दोस्ती करी है, तो निभानी ही पड़ेगी।
कमरा मेरा भी दोस्त था। मैं उसे ऐसे छोड़ कर कैसे चला जाता।
मैंने एक बल्ब लिया, जो की मैंने ही खरीदा था। और कमरे में लगा कर आ गया।
अब मैं उसे देख पा रहा था।
खामोश कमरा मानो आज मुझसे कुछ कहना चाह रहा हो।
मैं अपना बिस्तर, तकिया और दो तीन बैग लेकर खड़ा रहा।
कमरे की तरफ देखकर बस इतना समझ पा रहा था कि....
इस घनघोर खालीपन से बेहतर थी.....
वो सुकून भरी खामोशी।
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